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Thursday, August 15, 2019

वक़्त

मैं समय हूँ
मैं कल था, मैं आज हूँ
मैं कल तेरा था,
आज उसका हूँ
मगर कल फिर से तेरा होऊँगा
मैं वक़्त हूँ

मुझे ठहरना नहीं आता ,
मुझे बस बदलना ही भाता
मैं बिगाड़ता भी हूँ, मैं ही सँवारता हूँ
कल वहाँ , तो अब यहाँ
मैं निरंतर गतिमान हूँ

मैं सिखाने आता हूँ,
सीख़ गए.. तो बुरी याद बनके चला भी जाता हूँ
गर न सीखे.. तो कुछ देर और ठहर जाता हूँ!
मैं जीवन हूँ

मैं तुम हूँ , मैं मैं हूँ
मैं ही आशा , मैं ही पश्चाताप
मैं ही भगवान , मैं ही असुर
मैं ही अच्छा और सिर्फ मैं ही बुरा
मैं ही सब कुछ हूँ

मैं समय हूँ

मैं तेरा वक़्त हूँ

Monday, January 5, 2015

अभी बाकी है

अश्क़ सबूत हैं,
तेरे हिस्से का इश्क अभी बाकी है;
रश्क़ जो किये थे तुझसे,
उनका हिसाब अभी बाकी है;
ज़िन्दगी पड़ी है बहुत,
ये साथ यहीं तक बस हुआ...,
शायद यहाँ से आगे भी हो....;
थोड़ी आस अभी बाकी है!!


Because A lot happens and then Poetry happens!!


----And juts the next day , ABHI BAAKI HAI gets featured in this.....Pasting a screenshot!! :D



Monday, July 1, 2013

Hope is the only Dope


I just know
that I can see the start of it all-
The one which is sure to crumble me
and won't leave me unaffected

The end is far & misty
but I have a walking stick
of my faith and the love of my folks,
to lead me through the fog &...
I have my thank u note already ready for the best!

My fingers will be crossed,
for the better and the best
for their happy souls and my ultimate peace
and I don't wish to pretend this time
for I take it all destined,
and still pray for a beautiful destiny in hold

Let the best happen for the rest of it all
let the end overshadow the beginning of this misery
and then I will say

I have seen it all!

The Ray of Hope #KaveeshaKlicks





Friday, June 7, 2013

भीगे एहसास


जब मन पहले से
भीग रहा हो एहसास में
और ऊपर से बरसात
हो जाये इस इत्तेफाक में

आँखें ढूंढे कोई छाँव ,
सर छुपाने के सरफ़राज़ में
और ढ़ेरों कोशिशों बाद मिले
छितरी पत्तियों वाला एक अधनंगा पेड़
जो खुद ही जैसे पनाह चाहता हो
किसी मांगे हुए लिबास में,

फिर क्या उम्मीद और क्या प्यास,

एहसास भीग गए अब तो बरसात में
इत्तेफाक गल गए
आज इस मांगे हुए, पुराने लिबास में !!

Tuesday, April 9, 2013

किस्मत


किस्मत ग़र बिका करती दुकानों में, 
तो सोचो कीमत क्या आंकी जाती 
ख्वाहिश तो सब करते थोड़ी थोड़ी खरीदने की ,
पर हैसियत फिर आड़े आजाया  करती; 

किस्मत की कीमत भी फिर, 
शायद किस्मत जैसी ही हो जाती 
दाम चुकाने के लिए 
फिर थोड़ी किस्मत की दुआ की जाती ;

फख्र करें इसके बदले 
थोडा सुकून हासिल हो जाता मुफ्त में 
तब दुआएं क़ुबूल हुआ करती 
कीमत और किस्मत काश बेगैरत होती !

Peace Is Sleeping #KaveeshaKlicks

Friday, December 21, 2012

आवाज़

आवाज़ दी है, 
कुछ दूर तक तो गयी होगी 
तूने सुना होगा, कुछ आहिस्ता से, 
कुछ असर तो हुआ होगा; 

मेरी आवाज़ है अगर तेरे एहसास में 
तो कुछ तो उमड़ा होगा 
क्या हुआ जो मुझ तक तेरी आवाज़ नहीं पहुंची 
मैं सोचती हूँ , 
आवाज़ सुन कर मेरी 
तूने मुड कर , इधर उधर तो देखा होगा!!


With special remeberence and fond thoughts, this one came out in a jiffy of say 60 seconds, and not even in lone moments but right in middle of a hangout , in between the conversations! 
tells me how big a bluff-master a human's mind could be!! 

Wednesday, December 19, 2012

मेरा अज़ीज़ सामान

क्यों ऐसा होता है 
के कभी कभी घर से  निकलके 
बहुत दूर चलने के बाद 
याद आता है , के 
पीछे कुछ छूट गया 

कुछ ज़रूरी सा, कुछ अज़ीज़ सा 
जो संभाला था कई जतनों से 
वही बेहद कीमती सा, 
घर पर ही छूट गया 

अब् पीछे जाना मुश्किल है 
और आगे चलना भी मुनासिब नहीं 
क्या करूँ, दिल में बड़ी कश्मकश  है 

कुछ देर रुक जाती हूँ 
बीच रास्ते  में  अनमनी सी होकर थम जाती हूँ 
फिर कुछ सोच के, भारी मन से 
आगे बढ़ जाती हूँ 
पर मेरा मन , वहीँ छूट जाता है 

मेरा वह अज़ीज़ सामान , 
मुझे अब भी वापस बुलाता है 

Sunday, December 9, 2012

"बदलाव"


वक़्त गुज़रता है , रिश्ते बदलते हैं
दिलों के साथ साथ , दिलों के डर भी बदलते हैं
किस्से, कहानियाँ, यादें बदलती हैं
शामों के साथ , फिर रातें बदलती हैं ,
एहसास बदलते हैं , अलफ़ाज़ भी बदलते हैं
इज्हारों के साथ , उम्मीदें बदलती हैं
इंसान और फितरतें भी ,
आखिर बदल जाते हैं ;

सिर्फ बदलाव ही तो है जो एक सा रहता है
इसके अलावा तो
सब कुछ बदलता है !!



"Because only Change remains constant!!"






Friday, November 30, 2012

ऐसा भी होता है

Photo- http://bit.ly/QRtbhz
क्या तुम्हें मालूम है ,
ऐसा भी होता है, 
कभी कभार, 
गले में जैसे कुछ, 
अटका सा रहता है; 
सांस का रुख पलट जाता है 
और आँखों का समा ज्यादा रौशन नहीं होता 
मालूम है ऐसा कब होता है, 
जब कुछ अपना, बहुत अपना 
कहीं खो जाता है 
और मैं सोचती हूँ ,
अभी तो यहीं था , ऐसे कैसे खो सकता है 
कुछ दिन ढूँढती  हूँ, 
फिर थोडा मन को समझाती  हूँ, 
अब क्या होगा सोचने से ;
और मन फिर से ज़रा सा ,
भर सा आता है! 

Friday, October 26, 2012

ऐसे नहीं


"खामोश होकर भी कुछ लव्ज़ बंजर नहीं हुआ करते 
ज़रा ज़रा सरकने से फासले नहीं बना करते "

Sunday, August 26, 2012

मय


कभी भुलाने के लिए पीते हैं कभी सहलाने के लिए 

और कभी पी कर जो लिखी थी उसे मिटाने के लिए

Saturday, August 25, 2012

इरशाद किया है

जो बात बाहर आई है,
 न जाने कितने  दिनों से पक रही थी 
मुट्ठी तो बंद थी ,
मगर रेत फिर भी रिस रही थी 
ज़र्रा ज़र्रा समेत के,
 इन लव्जों को पिरोया है 
नज़्म नहीं ये तो,
 मेरे ज़ेहेन का  इक रोयाँ  है 
मिल जाये कोई 
जो साफ़ दिल से इल्तिजा करे 
पकी हुई भूख का
 ये तो पहला निवाला है 

There are moments when you have so many good things around you and you can’t capture them all and keep them forever, u can’t click a photograph or possibly u can’t take down the notes and all you can do is open up yourself to the limit even you don’t know. Hear it will all your senses and absorb the moment. Take mind pictures and just live the moment!!

This poem is inspired by one of my most eventful and candid conversation with Irshad Kamil (a renowned Poet/lyricist) And i could see that more or less all poets cross the same roads in their lives! Thereby naming this poem after his name!!