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Friday, July 16, 2021

Departure

 I have picked my favorite flowers for my own funeral

And I have created a playlist of my favorite songs to play once I am gone

My departure dress is all ironed and scented, hung rightmost in my wardrobe, 

And I have carefully enveloped last love notes, pressed nicely in my jewelry box

I plan to leave just the way I met you

All giggles, magical and unannounced

I have been loved in this beautiful world

I have given love, and more than I thought I had

So, wave me bye, and smile while you do that

No hanging threads, no turmoil

I will see you here and there in this wonderful world

Our paths may cross again, maybe in another disguise, in another lifetime

Until then, remember me with my lovely smile

Until then, remember to wear your beautiful smile  



- LOVE :) 

Friday, April 23, 2021

स्वेटर

खुद को पिरो दिया तुझमे इतना

की हर धागे के खीचने से सिसकी निकलती है 

जी करता है एक बार मे उधेड़ दूँ ये पूरा स्वेटर

वापस एक ऊन का बेमतलब का गोला बना दूँ

जो अधूरा सही मगर संभाल के रखा जाता हो 

मगर उंगलियां मानो अकड़ जाती हों 

इस खयाल भर से...

शायद तुझे और रंगों की चाहत है 

मिलके उनमें, और फबेगा तू 

नया डिज़ाइन नया नमूना 

पल में बिखर के फिर नया बनेगा तू 

तो क्या करूँ 

खुद के धागे खींच के निकाल दूँ?

या रहने दूँ, यूँही थोड़ा पुराना थोड़ा अपना सा

धो सूखा के करीने से संदूक में सहेज लूँ 

की अगले बरस फिर सर्दियों में 

तेरी याद आएगी

Tuesday, December 18, 2018

Untitled नज़्म -ऐ -ज़िन्दगी

कुछ नज़्मों के न
title नहीं हुआ करते,
क्युकी जब वो पैदा हुई
तब खुद ब खुद
खुद को कहती चली गयी..
समझ में भी नहीं आ पाया
और नज़्म बन के खड़ी हो गयी!
उसी तरह जैसे
खुद ब खुद हालात बनते जाते हैं,
और एक नयी ही ज़िन्दगी
सामने आकर खड़ी हो जाती है!
वो भी ऐसी
जो कभी सोची भी नहीं थी ..
उसी तरह ,
जैसे वो नज़्म बन जाती है ,
जिनके title नहीं हुआ करते ..!! 

Thursday, May 10, 2018

इन्ही बादलों में घुमड़ जाऊँ,
या इसी समंदर से लिपट जाऊँ;
संसार की साजिशें अब समझ नहीं आती
जी में आता है,
यहाँ से वापस न जाऊँ!
रंग बदलता है जीवन,
इसी समंदर के पानी जैसा ;
कहीं खुशनुमा हल्का नीला..
कहीं भयावह काला गहरा!
कभी सूरज आँख दिखाता है,
कभी यहीं पे चाँद मुस्कुराता है ;
मगर जीवन तो इस कश्ती जैसा,
अतिशय चलता जाता है..!
जी में आता है..
ये फ़लसफ़ा समझ पाऊँ!
इन्ही लहरों में सिमट जाऊँ
यहाँ से वापस न जाऊँ!


#oneweekthreecountries #voyageroftheseascruise #indianocean #may2018 

Wednesday, April 27, 2016

Dialogue!


"मेरे हिस्से वाला दिल का टुकड़ा संभाल के रखना"

"तेरा टुकड़ा थोड़ा नाज़ुक था न अभी
 सो सबसे ऊपर रखा है
 डर मत
 कुछ  नहीं होगा "

"नाज़ुक चीज़ें टूटने का सबसे ज़्यादा डर होता है
 इसलिए बोला"

"तभी तो सम्भाल के रखा है,
 जैसे कोई नयी जान हो"

"यूँ दिल के टुकड़े किये तो किये,
  एक उठा कर चल भी दिए"

"तुम्हारी आँखों से ओझल हुए कभी?
 इश्क़ की सहेलियां ये शिकायतें,
 उफ़्फ़ ...बिलकुल पागल हैं"  
.


.

                                       " कभी कभार दिल के कई टुकड़े करने पड़ते हैं                                                                             ताकि हर इश्क़ को थोड़ी थोड़ी जगह दी जा सके"

Monday, March 7, 2016

ये वो नहीं

तेरे ज़िक्र में मेरा ख़्याल नहीं
मेरे ख़्याल में तेरा ज़िक्र नहीं
किस मोड़ पे गए हाथों में हाथ लिए
एक दूसरे की फ़िक्र नहीं!
वक़्त नहीं,जस्बात नहीं
तू तू नहीं, मैं मैं नहीं;
ये वो दुनिया नहीं,
ये पहले जैसी ज़िन्दगी नहीं!!

Wednesday, December 30, 2015

इबारतें (6)

इबारतें बेख़ौफ़ हैं
इबादतें बदशक्ल,

मेरे हज की गलियों के नक्श
नाखून से खुरचना चाहा हो किसी ने जैसे

ज़िन्दगी मुझसे ही पलट के सवाल पूछती है
आखिर क्या सोच के किया जो किया,
पन्नों पे लिखाई भी मुश्किल हो रही है
ओस भीगे पत्ते भी कभी जलते हैं भला

इबादतें दिखने लगी हैं अब इबारतों में
बस ज़िन्दगी की हँसी सुनाई देती है


one more EMI of Ibaratein Poetry Series- 10 months in between


इबारतें : Writing
इबादतें: Prayers
नक्श:Map

Friday, April 24, 2015

Explode in me!



Confide in me
Escape in me
What you have been
wanting to say for so long
...
Explode in me!

I will be your tinted glass
I will be your wall of stone
I will not break nor let it out
I will absorb it all
...
You,
Scream in me!

Talk it out
Let it out
Worry not,
Just say it aloud
....
Hide in me!

No words shall be spoken back,
No advice down the drain

Your heart may just smoke it out
And it shall all be gone with the wind
....
Have some faith in me!


But, 
As I said, 
....
Explode in me!


Sometimes all you want is to have a pair of sturdy ears, and no tongue, You don't want to be advised or told what to do, you just need to blast it out, without any revert. I wish i had someone like this, for me!! 

Friday, February 20, 2015

The Night Roads


Glistening and calm,
Tired from the day and stretching their arms,
The long curves of the empty roads,
And us breaking their little nap

The midnight trees bend to make a little love,
And the breeze sets in just the perfect mood,
Neon dividers radiate even more,
And us diving through the glorious slope,

The night was deep and without any moon,
Only them and us and a little song,
We let them go back to the nap as we pass
And us riding further, stirring their pause!




The next time you go for a midnight ride, carry this little thought with you, 
You might be disturbing silence of many, let them make their love, let them unite with the peace. 




Tuesday, October 14, 2014

Scar


A Scar
A Stitch
A Twitch, 


A History, 
A Mystery
A Story, 

A Pain
A Remembrance 
A Resurrection, 

A Memory,
A Story
A Scar..!! 



PS- Scars are sexy to have! Coz they carry a history, a story and something else than usual eyes/lips to remember in a face! \

PSS- I Have One! 

Friday, July 4, 2014

क्या है इश्क़

अरसे हो गए जब दुनिया को ऐलान करते
की हाँ इश्क़ में हैं हम,
आज सोचते हैं,
कमबख्त ये इश्क़ आखिर है क्या

कमसिन उम्र में,
जब पेट में तितलियाँ उड़ा करती थीं
उनके ज़िक्र के नाम से,
सोचते थे इश्क़ जो है यही है ;

जो थोड़ा होश संभाला
और जो खुद के गुनाहों का दौर आया
उन्होंने जो गुनाह नज़रअंदाज़ कर दिए,
सोचते थे इश्क़ जो है यही है;

जब इश्क़ भी इश्क़ के गुनाहों में संग गुनहगार हो गया,
और दोनों ने मिल के उसे दुनिया से छुपाया,
तब सोचा हो न हो, इश्क़ यही होगा;

मगर आज,
जब इश्क़ की आखिरी
मंज़िल पाने का मुकाम आया;
तब सोचते हैं,
कहीं ये महज़ सालों की आदत तो नहीं?

क्युकी तितलियाँ तो अब,
दूर दूर तक नहीं;
और गुनाह छुपाने का हुनर भी
खूब सीख गए हैं;

आज जब अरसे हो गए
उस ऐलान को ,
तब सोचते हैं,
कमबख्त ये इश्क़ आखिर है क्या!!   

Tuesday, June 10, 2014

पुराना शेर

एक पुराना शेर याद आया 
और शेर जब पहली बार कहा था, 
वो ज़माना भी संग आया
भूली गलियों में वापिस भटकने को
अपने मन का
एक बार और मचलने का दिल हो आया
पुराने शेरों की क्या बात कह दी, 
उनसे जुड़ा हर एक अरमान याद आया!
बीते अरमानों का जो मैंने हलके से हाथ सहलाया, 
सच..
वही पुराना शेर, जो उस वक़्त यूँ ही कह दिया था,
मुझे आज याद आया!
इत्तेफाक से आज फिर कुछ ऐसा हुआ
कि दिल भर आया,
वही पुराना मौसम निकला;
आज उसने फिर से सब कुछ दोहराया
आज फिर दिल भर आया 
तो मुझे फिर,वही पुराना शेर याद आया!


Also pasting the so much talked about "पुराना शेर" here: 
"ये गम भी मुझे अज़ीज़ है, 
ये उन्ही की दी हुई चीज़ है"



Friday, June 6, 2014

वो जगहें


वो जगहें हम जहाँ से गुज़रे थे कभी
अब दोबारा जब रूबरू होंगी तो शायद वो होंगी
लोग अलग होंगे माहौल अलग होगा
शिर्कतें अलग होंगी और  शायद साथी भी अलग
तो दोबारा उन रास्तों को उस नज़र से देखना ही नहीं
गर देखा तो उम्मीद वही होगी
पर मंज़र अलग होगा

Wednesday, October 16, 2013

उथल पुथल

जानते हो,

मन की उथल पुथल किसे कहते हैं ?

जब दूर से आती अज़ान की आवाज़ भी बगल के कमरे से ही आती लगे,

शांत ठंडी बिखरी रेत भी खुद की गर्मी से पिघलती सी लगे

और बेहद सन्नाटे से उठने वाली सूँ भी कानो से चिपकती सी लगे

मगर दिमाग हांफ रहा हो ...,

के इतने ख्यालों को समेटते समेटते , सांस फूल रही हो जैसे ;

और बिन साथी के भी बिस्तर पर ढेरों सिलवटें पड़ गयी हो जैसे

के बेफिक्री से भरे पूरे शहर में , एक कमरा फ़िक्र ने किराए पे लिया हो जैसे

उथल पुथल ,

उसे कहते हैं !

Friday, June 7, 2013

भीगे एहसास


जब मन पहले से
भीग रहा हो एहसास में
और ऊपर से बरसात
हो जाये इस इत्तेफाक में

आँखें ढूंढे कोई छाँव ,
सर छुपाने के सरफ़राज़ में
और ढ़ेरों कोशिशों बाद मिले
छितरी पत्तियों वाला एक अधनंगा पेड़
जो खुद ही जैसे पनाह चाहता हो
किसी मांगे हुए लिबास में,

फिर क्या उम्मीद और क्या प्यास,

एहसास भीग गए अब तो बरसात में
इत्तेफाक गल गए
आज इस मांगे हुए, पुराने लिबास में !!

Friday, May 3, 2013

इबारतें (3)


इबारतें थमीं हैं ,
आजकल,
इबादतें बदलाव पे आमादा हैं ;

मेरे हज की गलियों के नक्श 
शायद किसी पुराने संदूक में,
आराम फ़रमाते होंगे ,
मगर गलियां मुझे याद हैं; 

हर आहट समेटती ,
इन पन्नों की गिनती ख़त्म होने पे है 
मगर ये बदलती इबारतें, 
मुझे मेरे हज की गलियों में 
बार बार धकेल आती हैं;  

इबारतें अब भी थमी हैं, 
इबादतें मगर, 
रोज़ाना बदल रही हैं | 


And Ibaratein part 3 is here- after 4 months of Ibaratein 2 

A few words have become family to this series, featuring themselves in every post but the connection keeps on changing! 
I am not sure i will write other parts to "Ibaratein" series or not but am sure if I do, teh thread will be seen, strong and long! 
Read Ibaratein 1 here!! 

इबारतें : Writing
इबादतें: Prayers
नक्श:Map
बेबाक:Frank