Labels

Showing posts with label Shayari. Show all posts
Showing posts with label Shayari. Show all posts

Friday, May 1, 2020

सुनो


सुनो 
कभी कभी तरस भी आता है तुमपे 
प्रेम के युग को बीतते देख रहे हो 
और नितांत शून्य साधे बैठे हो? 
शायद तुम्हारे लिए वक़्त ठहर गया है
या शायद,
गुज़र गया है
क्या बुद्ध हो गये हो? 

***************************************


सुनो,
ये जो इतना झिझकते हो न तुम 
कही गलती से भी प्रेम छलक न जाये 
गंभीर नपी तुली बातों से कहीं 
एक सिरा भी ढीला होके छूट न जाये
न पता लग जाये मुझे 
अब भी कहीं गरमाईश है बाकी
न पूछ लूँ पलट के मैं 
क्या इश्क़ है आज भी..., ज़रा भी?
बस वही!

***************************************

सुनो,
ये जो हर चीज़ छोड़ देने की आदत है ना तुम्हारी
बुरा लगा क्या? ठीक, अब से बोलूंगा ही नही
रिश्ते में कुछ अधूरा लगा क्या? ठीक, अब से रिश्ता रखूंगा ही नहीं
ये एक दिन सब कुछ छुड़वा देगी तुमसे
तुम्हे तुमसे भी
याद रखना
बस वही!

***************************************


सुनो
पता है तुम्हे अच्छा नही लगा
पर मुझे लगता है
थोड़ा सह लो??

***************************************

सुनो,
ये जो तुम अनजान बनने का नाटक करते हो न
जो मैं सच समझती हूँ जब द्रवित होती हूँ
बस वही!

*********************************************************

सुनो,
मुझे धीरे धीरे समझ आ रहा है
कि तुमको शायद कभी समझ नही आएगा
या शायद समझ के भी न समझने का नाटक करोगे
मगर मुझे वो भी समझ आ जायेगा
समझे?
बस वही!

***************************************

सुनो
जब उखड़ते हो कि मैँ कुछ लिख नही रही, पढ़ नही रही, कैनवस पर कुछ नया उकेर नही रही
और मैँ कितना कुछ महसूस कर जाती हूँ ये सब सुन के ...
बस वही!

***************************************

संकलन

Add caption
उसने कहा
मैं दुआ करूँगा तुम्हारे लिए
मैंने कहा,
दुआ में मांगना के
मेरा दिल जुड़ जाए

****************************************************************************

तुममें और कुछ नही था पाने को
प्यार भी जो था, सारा मेरा ही था

***************************************************************************


चलो एक एक ऊन मिलके सुलझाएँ ?
शायद एक नया स्वेटर बुन जाए
थोड़ी गर्माहट दे जाए

**************************************************************************

तुममे सबकुछ अदभुत
इतना के मानो अलौकिक
मानो झूठ, इतना अदभुत
इतना अलौकिक, 
मगर फिर भी सच 


**************************************************************************

विरासत लिखते समय
अपनी कविताओं की डायरी तुम्हे नहीं दूंगी 
यही मेरा एकलौता 
रूठना रहेगा तुमसे 

**************************************************************************

अगर मैं लड़का होती
तो प्रेमिका की हर ज़ुल्फ़ को शब्दों में कैद कर देती 
गूंथ देती रिबन उसमे अपनी कल्पनाओं के 
तारीफ यूँ करती 
कि वो अपने चाहने वालों से 
मेरी सी ही अपेक्षा करती 
अगर मैं लड़का होती 
तो मैं प्रेम करती या नहीं करती 
लेकिन उसे नाव में बिठाके 
ओझल नहीं होती


वादा करो
ख़त लिखोगे
हमेशा
और नीचे
'हमेशा तुम्हारा'
के साथ
अपना अटपटा बच्चों वाला
Sign करोगे
वादा करो
ख़त लिखोगे
हमेशा


*********************************
कोफ्त होती है खुद पे, तुमसे बात करके
कोफ्त होती है तुमपे, जब तुम मुझसे बात नही करते

*********************************

तुम्हारी भी गली सुनसान रहती है अब
लगता है इश्क़ उसे भी छोड़ गया

*********************************


अपने ही ग़म काफी हैं मशगूल रहने के लिए
तेरे भी  बाँटने चले तो मशहूर न हो  जाएँ


*********************************

बासी सी बरसातें
कोरे रूखे राज़
रोज़मर्रा सी धूप
और वही पुरानी बात


*********************************

सच है ताउम्र तलाश की इन्तेहाँ नहीं होती
मगर ख़ूबसूरत से सफ़र की कुछ यादें साथ रहें
तो ज़रा सांस आती है

Monday, August 12, 2019

लम्बी रात

जब रात अँधेरी छायी थी, जब कोसों तक तन्हाई थी
जब शोर में दबी रुलाई थी , अश्कों ने महफ़िल सजाई थी
मैं चलते चलते रूकती थी और सोते सोते जगती थी
किस्मत से रुस्वाई थी पर याद तुम्हारी आयी थी

हालात और हालत

सुर्ख नज़रें बता रही हैं , तेरी ये सहर भी शमा सी रही
धुआं उठते देखा बस हमने , हरियल एक पल में बंजर हुई
हसरतों से जोड़ी एक एक पाई , छन से बिखरी पोटली हुई
सुर्ख नज़रें बता रही हैं, तू क्या से क्या हो गयी 

ख्वाहिशों का कसूर

ख्वाहिशों की ख़्वाहिश होना भी अब बेमतलब सा लगता है
तेरा भी कसूर है, ये कहना भी अब कसूर सा लगता है



Tuesday, December 18, 2018

दूर इतना भी न होना
के पास होने की
आदत ख़त्म हो जाये

न इश्क़ आये
न इश्क़ का खयाल..

ये ज़ख्म भी वक़्त के साथ
कहीं भर न जाये ..!

Tuesday, June 10, 2014

पुराना शेर

एक पुराना शेर याद आया 
और शेर जब पहली बार कहा था, 
वो ज़माना भी संग आया
भूली गलियों में वापिस भटकने को
अपने मन का
एक बार और मचलने का दिल हो आया
पुराने शेरों की क्या बात कह दी, 
उनसे जुड़ा हर एक अरमान याद आया!
बीते अरमानों का जो मैंने हलके से हाथ सहलाया, 
सच..
वही पुराना शेर, जो उस वक़्त यूँ ही कह दिया था,
मुझे आज याद आया!
इत्तेफाक से आज फिर कुछ ऐसा हुआ
कि दिल भर आया,
वही पुराना मौसम निकला;
आज उसने फिर से सब कुछ दोहराया
आज फिर दिल भर आया 
तो मुझे फिर,वही पुराना शेर याद आया!


Also pasting the so much talked about "पुराना शेर" here: 
"ये गम भी मुझे अज़ीज़ है, 
ये उन्ही की दी हुई चीज़ है"



Friday, July 19, 2013

तीन एहसास



बीती रात भीगी थी कुछ उम्मीदों के सैलाब में ;

आज की शाम भी कुछ नम ही गुज़री उन्ही उम्मीदों के ख्याल में 


>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>


महफूज़ करना इन लम्हों को बेशक़ ये भागते से नज़र आएंगे 

भर लेना किसी खाली शीशी में कुछ अंश तो कम से कम तेरे संग रह जायेंगे 


>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>


इश्क महफूज़ किसका हुआ है आज तक जो तेरा ही होगा, 

इसका एक जुर्म ही यही है कि बस ये ठहरता नहीं है 




Monday, February 18, 2013

आरज़ू



"इश्क-ए-हकीकी  और इश्क-ए-मजाज़ी  में
फर्क फ़क़त इतना है
के एक में पाने की आरज़ू कभी ख़त्म नहीं होती
और दुसरे में कब की दफ़्न  हो जाती है!"


Ishq-e-haqiqi - Divine Love and Ishq-e-majazi- Earthly love 
The only difference between the two is that in one desire is eternal and in another - it begins only when the desires are already satiated!

Why I am writing a description of this sher- coz it inflicted quite a controversy when discussed amongst my poet friends. 

My Point of view:

"The desire to attain something is killed the moment you get it!"
In divine love, the lover knows he is never going to attain the beloved- the God, so the desire of still attaining him in some way goes on; whereas in earthly love- the poetry and the pain begins only after when the lover knows he will never be able to attain the beloved!

It  might contradict with many point of views out there in the world! if it clashes with yours, let me know! Drop your interpretation of the sher in the comment box- lets spread more meaning to love and poetry! 

Friday, January 25, 2013

तस्वीरों के लोग


"उन तस्वीरों को दीवार पे जगह देने का क्या फायदा ,

जिनमें  मुस्कुराते लोग अब ज़िन्दगी से रुखसत हो गए "

Monday, December 3, 2012

नींद

"बहुत खुशनसीब होते हैं जिन्हें नींद नसीब होती है , 
कुछ पलों के लिए सही , बेसाख्ता ख्वाहिशों से निज़ात तो मिलती है "

Tuesday, November 27, 2012

जाते जाते

सोचा था मैंने शायद होना मेरा ख़ुशी है तुम्हारी , 
ख़ुशी हुई जान के, की जाते जाते भी मैंने तुम्हे मायूस नहीं किया 


Friday, October 26, 2012

ऐसे नहीं


"खामोश होकर भी कुछ लव्ज़ बंजर नहीं हुआ करते 
ज़रा ज़रा सरकने से फासले नहीं बना करते "

Sunday, August 26, 2012

मय


कभी भुलाने के लिए पीते हैं कभी सहलाने के लिए 

और कभी पी कर जो लिखी थी उसे मिटाने के लिए

Tuesday, August 14, 2012

किस्मत

खुद के दिल के हाथों मजबूर होना 
कहीं ज्यादा बेहतर है,
किस्मत का धोखा खाने से 

Saturday, July 21, 2012

उलझन

"कभी हैसियत नहीं होती तो कभी ख्वाहिश नहीं होती 
गर कभी आरजू हो, तो उस बदनसीब की किस्मत नहीं होती" 

Wednesday, May 30, 2012

खुशनसीब बदनसीबी

When its all easy around, you know you can stand facing each other, when its difficult, you forget all the pretense, reasons and just shrink together-to face it!!


आमने सामने थे अब तक, 
रुसवाइयों का आलम था, 
शुक्र है जो ये मुश्किल वक़्त आया, 
तुम सामने से चल के, मेरे पहलू में तो आ गए !!

“A Relationship..Doesn’t shines by shaking hands in the best times..It blossoms by holding hands in critical times.”








Wednesday, May 23, 2012

राहत

दूर मुझे करके ,
ज़रा सुकून तो हासिल हो जायेगा 
'वक़्त तो बीत जायेगा , 
मगर,
सिलसिला शायद बदल जायेगा 

Monday, May 21, 2012

हार-जीत


इक कलम पकड़ कर सोचते हैं 
ज़िन्दगी की जंग जीत लेंगे 
क्या खबर पड़ने वालों को 
हम बहुत पहले मात खा चुके हैं