Showing posts with label time. Show all posts
Showing posts with label time. Show all posts

Thursday, August 15, 2019

वक़्त

मैं समय हूँ
मैं कल था, मैं आज हूँ
मैं कल तेरा था,
आज उसका हूँ
मगर कल फिर से तेरा होऊँगा
मैं वक़्त हूँ

मुझे ठहरना नहीं आता ,
मुझे बस बदलना ही भाता
मैं बिगाड़ता भी हूँ, मैं ही सँवारता हूँ
कल वहाँ , तो अब यहाँ
मैं निरंतर गतिमान हूँ

मैं सिखाने आता हूँ,
सीख़ गए.. तो बुरी याद बनके चला भी जाता हूँ
गर न सीखे.. तो कुछ देर और ठहर जाता हूँ!
मैं जीवन हूँ

मैं तुम हूँ , मैं मैं हूँ
मैं ही आशा , मैं ही पश्चाताप
मैं ही भगवान , मैं ही असुर
मैं ही अच्छा और सिर्फ मैं ही बुरा
मैं ही सब कुछ हूँ

मैं समय हूँ

मैं तेरा वक़्त हूँ

Wednesday, December 23, 2015

लगता है सालों पुरानी बात है

तस्वीरें है कुछ मेरी तुम्हारी
अभी बस हाल फ़िलहाल की
रोज़ पलटती हूँ, हमें साथ देखने को
मगर,
लगता है सालों पुरानी बात है

लगता है जैसे अरसा गुज़र गया तुम्हें देखे हुए
कही चेहरा भूल जाऊं.. यूँ भी सोच लिया करती हूँ
तुम्हारा इंतज़ार होकर भी नहीं है
इतना लम्हा गुज़र गया तुमसे रूबरू हुए


हर दिन मानो इक साल जैसा है
बस खुद जोड़ लो कितने साल गुज़र गए;
वादे किये थे तुमने बस अभी कुछ दिन पहले
मगर,
लगता है सालों पुरानी बात है

Wednesday, October 14, 2015

थोड़ी रेत लौटा आये हैं

हर बार जब जाते थे समंदर किनारे
थोड़ी रेत साथ लाते थे
यादों की, मुलाक़ातों की
कुछ धूल संग ले आते थे

इस बार जब गए थे समंदर किनारे,
थोड़ी रेत उसकी उसको,
लौटा आये हैं;
कितनी  हसीन थी पिछली ज़िन्दगी ,
वो  सारी, समंदर में छोड़ आये हैं!

किसी ने नहीं देखा  हमें ...
हम वहाँ से इस बार क्या लूट लाये हैं !
बस वो समंदर गवाह है,
हम इस बार उसका जादू साथ लाये हैं ...

जिसकी अमानत थी,
उसको वापस दे आये हैं ;
इस बार,
थोड़ी रेत लौटा आये हैं..!!




Wednesday, February 13, 2013

महफूज़ लड़ियाँ


Sandook


कुछ हर्फ़ पिरोये रखे थे,
लडियां बना कर ,
अरसों से , संदूक में महफूज़ छोड़े थे

सोचा था ,
सदियाँ बीतने के बाद ,
वक़्त की थोड़ी धूल चड़ने के बाद ,
इन लड़ियों का मोल बदल जायेगा ,
शायद थोडा और बेशकीमती हो जायेगा ;


BlackPearls 
पर वक़्त हमेशा नहीं उड़ता ,
थोड़ी धूल जमी ही थी ,
कि व्याकुल हाथ उन सहेजी लड़ियों को टटोलने लगे,

पाया लडियां बिलकुल वैसी थीं ,
अब सोचती हूँ ,
कल सुनार को दे आउंगी ,
शायद अभी सहेजने का वक़्त नहीं आया है

Sunday, December 9, 2012

"बदलाव"


वक़्त गुज़रता है , रिश्ते बदलते हैं
दिलों के साथ साथ , दिलों के डर भी बदलते हैं
किस्से, कहानियाँ, यादें बदलती हैं
शामों के साथ , फिर रातें बदलती हैं ,
एहसास बदलते हैं , अलफ़ाज़ भी बदलते हैं
इज्हारों के साथ , उम्मीदें बदलती हैं
इंसान और फितरतें भी ,
आखिर बदल जाते हैं ;

सिर्फ बदलाव ही तो है जो एक सा रहता है
इसके अलावा तो
सब कुछ बदलता है !!



"Because only Change remains constant!!"






Friday, November 30, 2012

ऐसा भी होता है

Photo- http://bit.ly/QRtbhz
क्या तुम्हें मालूम है ,
ऐसा भी होता है, 
कभी कभार, 
गले में जैसे कुछ, 
अटका सा रहता है; 
सांस का रुख पलट जाता है 
और आँखों का समा ज्यादा रौशन नहीं होता 
मालूम है ऐसा कब होता है, 
जब कुछ अपना, बहुत अपना 
कहीं खो जाता है 
और मैं सोचती हूँ ,
अभी तो यहीं था , ऐसे कैसे खो सकता है 
कुछ दिन ढूँढती  हूँ, 
फिर थोडा मन को समझाती  हूँ, 
अब क्या होगा सोचने से ;
और मन फिर से ज़रा सा ,
भर सा आता है! 

Saturday, August 25, 2012

इरशाद किया है

जो बात बाहर आई है,
 न जाने कितने  दिनों से पक रही थी 
मुट्ठी तो बंद थी ,
मगर रेत फिर भी रिस रही थी 
ज़र्रा ज़र्रा समेत के,
 इन लव्जों को पिरोया है 
नज़्म नहीं ये तो,
 मेरे ज़ेहेन का  इक रोयाँ  है 
मिल जाये कोई 
जो साफ़ दिल से इल्तिजा करे 
पकी हुई भूख का
 ये तो पहला निवाला है 

There are moments when you have so many good things around you and you can’t capture them all and keep them forever, u can’t click a photograph or possibly u can’t take down the notes and all you can do is open up yourself to the limit even you don’t know. Hear it will all your senses and absorb the moment. Take mind pictures and just live the moment!!

This poem is inspired by one of my most eventful and candid conversation with Irshad Kamil (a renowned Poet/lyricist) And i could see that more or less all poets cross the same roads in their lives! Thereby naming this poem after his name!!