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Friday, April 29, 2016

क्या समझूँ ?

कुछ बाकी है हमारे बीच या सब ख़त्म समझूँ
अतना अर्सा गुज़र गया हमें "हम" हुए ,
इसका क्या मतलब समझूँ
सालों के जस्बात,
चंद महीनों में दफन हो गए,
इसे किसकी बेगैरत समझूँ;
एक बार मुझे पलट के देख तो सही,
तुम्हारी जाती हुई पीठ देख कर ही,
क्या समझूँ ?   

Tuesday, March 15, 2016

अनमनी

अनमने जस्बात हैं, अनमने ख़यालात हैं

अनमने से दिन हैं, अनमनी सी शाम है

अनमनी सी मैं हूँ, अनमने हालात हैं

असमंजस है, कश्मकश है,

उधेड़बुन है और ढेरों आघात हैं;

अनमना मन है,

और अनमनी है सारी ये ज़िन्दगी

न सुकून है, न छींट भर भी विश्वास है

है तो बस, सब कुछ अनमना

यही मन है, यही अब संसार  है!  

Wednesday, December 23, 2015

लगता है सालों पुरानी बात है

तस्वीरें है कुछ मेरी तुम्हारी
अभी बस हाल फ़िलहाल की
रोज़ पलटती हूँ, हमें साथ देखने को
मगर,
लगता है सालों पुरानी बात है

लगता है जैसे अरसा गुज़र गया तुम्हें देखे हुए
कही चेहरा भूल जाऊं.. यूँ भी सोच लिया करती हूँ
तुम्हारा इंतज़ार होकर भी नहीं है
इतना लम्हा गुज़र गया तुमसे रूबरू हुए


हर दिन मानो इक साल जैसा है
बस खुद जोड़ लो कितने साल गुज़र गए;
वादे किये थे तुमने बस अभी कुछ दिन पहले
मगर,
लगता है सालों पुरानी बात है